40+ Best shayari by mirza galib | मिर्जा गालिब शायरी

Best shayari by mirza galib |मिर्जा गालिब की शायरी 

Best shayari by mirza galib: Mirza Galib was the famour indian poet of 18th century.He wrote many sayari and poetry . He is among the most top urdu poets of all time.

In this article, we are sharing some of the best shayari by mirza galib. Explore and enjoy more such sayari and poetry in our blog. Definitely you will love them. Now let these Shayari dive into your heart.


Best Shayari by Mirza Galib


Best shayari by mirza galib : मिर्जा गालिब की शायरी।

जब लगा था तीर,

तब इतना दर्द न हुआ "गालिब" 

दर्द का एहसास तब हुआ,

जब कमान देखी अपनों के हाथों में.!!

______________________

jab laga tha teer, 

tab itana dard na hua "gaalib" 

dard ka ehasaas tab hua,

 jab kamaan dekhee apanon ke haathon mein.!!






हमें पता है तुम कहीं और के मुसाफिर हो,

हमारा शहर तो बस यूं ही रास्ते में आया था।

______________________

hamen pata hai tum kaheen aur ke musaaphir ho,

 hamaara shahar to bas yoon hee raaste mein aaya tha.






दर्द हो दिल में तो दवा दीजिए,

 दिल ही जब दर्द हो तो क्या कीजिए !!

______________________

dard ho fil me to dawa dijiye,

dil hi jab dard ho kya kijiye !!






ता उम्र बस एक यही सबक याद रखिए ,

"इश्क" और "इबादत" मे नियत साफ रखिए !!

______________________

Ta umr bas ek yahi sabaq yad rakhiye,

Ishq aur ibadat me niyat saaf rakhiye !!







गुजर जाएगा ये दौर भी "गालिब" 

जरा इत्मीनान तो रख,

जब खुशी ही ना ठहरी,

तो गम की क्या औकात है।

______________________

Gujar jaega yeh daur bhi "galib"

zara itminan to rakh,

Jab khushi hi na thehri,

to gam ki aukaat kya hai..!!






कितना खौफ  होता है शाम के अंधेरों में,

पूछ उन परिंदों से जिनके घर नहीं होते..!!

______________________

Kitna khauf hota  hai sham ke andhero me,

Poochh un parindo se jinke ghar nahi hote..!!




Best Shayari by Mirza Galib:


इश्क ने "गालिब" निकम्मा कर दिया,

 वरना हम भी आदमी थे कमाल के..!!

______________________

Ishq ne "Galib" nikamma kar dia,

Varna ham bhi aadmi the kamal ke..!!






हम जो सबका दिल है रखते हैं,

सुनो हम भी एक दिल रखते हैं ।

______________________

Ham jo sab ka dil rakhte hai,

Suno ham bhi ek dil rakhte hai !!








बेवजह नहीं रोता इश्क में कोई "गालिब" 

जिसे खुद से बढ़कर चाहो वह रुलाता जरूर है !!

______________________

Be wajah nahi rota ishq me koi "galib"


Jise khud se badkar chaho wo rulata jarur hai !!






कैसे करूं भरोसा,

  गैरो के प्यार पे,

यहाँ अपने ही लेते है मज़ा,

 अपनों की हार पे !!

______________________

Kaise karu bharosa,

Gairo ke pyaar pe,

Yaha apne hi lete hai maza,

Apno ki haar pe !!






दर्द मिन्नत कशे दवा न हुआ ,

सिर पे बैठा रहा दफा ना हुआ ॥

______________________

Dard minnat kashe dawa na hua,

Sir pe baitha raha dafa na hua ॥





रहने दे मुझे इन अंधेरों में "गालिब" ,

कमबख्त रोशनी में अपनों के असली चेहरे सामने आ जाते हैं !!

______________________

Rehne de mujhe in andhero me "galib",

Kambakht roshni me apno ke asli chehre nazar aa jate hai !!



इश्क पर जोर नहीं है ये वो आतिश है "गालिब"

 जो लगाए न लगे और बुझाए ना बुझे ॥

______________________

Ishq par jor nahi hai ye wo aatish hai "galib"

Jo lagae  na lage aur bujhae na bujhe !!





मुझसे कहती है साथ रहूंगी सदा,

बहुत प्यार करती है मुझसे "उदासी" मेरी !!

______________________

Mujhse kehti hai sath rahugi sada,

Bahut pyar karti hai mujhse "udasi" meri !!




Best Shayari by Mirza Galib:


हाथों की लकीरों पर मत जा ए ग़ालिब,

 नसीब उनके भी होते हैं जिनके हाथ नहीं होते ।

______________________

Hatho ki lakeero par mat ja ae glaib,

Naseeb unke bhi hote hai jinke hath naho hote ..






हर एक बात पे कहते हो तुम कि "तू क्या है"

 तुम ही कहो कि ये अंदाज-ए-गुफ्तगू क्या है?

______________________

Har ek baat pe kehte ho ki tu kya hai,

Tum hi kaho ye andaz-e-guftugu kya hai?






इशरत-ए-कतरा है दरिया में फना हो जाना,

 दर्द का हद से गुजरना है दवा हो जाना ।

______________________

Ishrat-e-qatra hai dariya me fana ho jana,

dard ka had se gujarna hai dawa ho jana





आजमाना अपनी यारी को पतझड़ में मेरे दोस्त,

 सावन में तो हर पत्ता हरा भरा नजर आता है ॥


______________________


Aazmana apni yari ko patjhad me mere dost

Savan me to har patta hara bhara nazar ata hai







वजह पूछने का मौका ही ना मिला,

वो लहजा बदलते गए और हम अजनबी होते गए !!

______________________

Wajah poochne ka mauka hi na mila,

Wo lehja badalte gaye aur ham ajnabi hote gaye .






मोहब्बत बड़ा हसीन अल्फाज है,

 हो जाए तो चेहरे पर मुस्कुराहट आ जाती है

 और टूट जाए तो आंखों में पानी तक सूख जाता है ।

______________________

Mohabbat bada haseen alfaz hai,

Ho jae to chehre par muskurahat aa jati hai

Aur toot jae to aankho me pani tak sookh jata h.







रास्तों ने चाहा तो फिर मिलेंगे हम,

मंजिलों का तो कोई इरादा नहीं दिखता |

______________________


Rasto ne chaha to phir milege ham,

Manjilo ka to koi irada nahi dikhta.





सेहम उठते हैं कच्चे मकान पानी के खौफ से,

 महलों की आरजू ये है की बरसात तेज हो !!

______________________


Sehem uthte hai kacche makan paninke khauf se,

Mehlo ki aarjo ye hai ki barsaat tej ho !!







बूंद बूंद की तलाश में समंदर में कूद गया,

जिस पानी की तलाश थी उसी पानी में डूब गया !!

______________________

Boond boond ki talash me samandar me kood gaya,

Kis paninki talash thi uso pani me doob gaya !!






रहुॅं उदास तो कोई खबर तक न पूछे,

अगर मुस्कुरा दिए तो लोग वजह पूछने लगते हैं ॥

______________________


 Rahu udaas to koi khabar tak na pooche,

Agar muskura die to log wajah poochne lagte hai ||







मोहब्बत की मिसाल में बस इतना ही कहूॅंगा,

बेमिसाल सजा है किसी बेगुनाह के लिए।

______________________

Mohabbat ki misaal me bas itna hi kahuga,


Bemisaal saza hai kisi begunah ke lie ।।






बस नजर-नजर का फर्क है,

 महबूब जिसका भी हो बेमिसाल होता है






चाहने वालों को नहीं मिलती चाहने वाले 

मैंने हर दगाबाज के साथ सनम देखा है ॥






कत्ल हुआ हमारा इस तरह से किस्तों में,

कि कभी खंजर बदल गए कभी कातिल बदल गए







बहुत अकेले होते हैं दुनिया में वह 

जो खुद रूठ कर खुद ही मान जाते है






जब भी याद आएगी महक लिया करेंगे

 हमने तुम्हारी यादों को इत्र बना कर रखा है






बहुत शौक था मुझे सब की फिक्र करने का 

होस तो तब आया जब मुसीबत में कोई फिक्र करने वाला न मिला







अजीब लोग बसते हैं शहर में मेरे 

मरम्मत कांच की करते हैं पत्थर के औजारों से






मोहब्बत थी तो चांद भी अच्छा था

 उतर गई तो दाग भी दिखने लगे





इतनी ठोकरे देने के लिए शुक्रिया ए जिंदगी

चलने का न सही संभलने का हुनर तो आया







रद्दी तक तोली जाती है तराजू में बिकने से पहले तुम्हें कोई परख रहा है तो इसमें बुरा क्या है








Best Shayari by Mirza Galib:

सिर्फ मैं ही मैं हूं दिल में उसके ले डूबी मुझे ये गलतफहमी मेरी












डूबा है मेरा बदन मेरे ही लहू में,

ये कांच के टुकड़े पर भरोसे की सजा है ||

______________________


Duba hai mera badan mere hi lahu me,

Ye kanch ke tukde par bharose ki saja hai






थोड़ा सीरत पढ़ने का हुनर रखिए साहब,

अक्सर लोग सूरत से साफ नजर नहीं आते ॥

______________________

Thoda sirat padhne ka hunar rakhie sahab,

Aksar log surat se saaf nazra nahi aate||







जिंदगी जला दी हमने जैसे जलानी थी,

अब धुए पर तमाशा कैसा, राख पर बहस कैसी ||

______________________


Jindigi jala di hamne jaise jalani thi,

Ab dhue par tamasha kaisa, rakh par behad kaisi ||






कीजिए अपनी निगाहों को एक चेहरे पर पाबंद,

हर सूरत पर लुट जाना तौहीन-ए-वफ़ा होती है ।

______________________

Kijie apni nigaho ko ek chehre par paband,

Har surat par lut jana tauheen-e-wafa hai.







यही सोचकर सफाई नहीं दी हमने,

इल्जाम भले ही झूठे हैं पर लगाए तुमने है।

______________________

Yahi sochkar safai nahindi hamne,

Ilzam bhale hi jhoote hai par lagae tumne hai ||



These were the best Shayari by Mirza Galib. Hopefully you liked it.Do share it with your friends. Thanks for reading!!

More such shayari,poetry and gazals are present in our website, please check them out.Share your thoughts, sayari on the comment box.

Post a Comment

0 Comments